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पटना साहिब का गांधी सरोवर गंदगी से बेहाल, पर्यटन स्थल बनाने की योजना पर संकट
- Reporter 12
- 28 Mar, 2026
हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही के बावजूद गांधी सरोवर परिसर में कूड़े का अंबार, नालों की बदबू और खटाल की गंदगी से लोग परेशान
पटना सिटी। पटना साहिब विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख स्थलों में शुमार गांधी सरोवर परिसर को पर्यटन के लिहाज से विकसित करने की सरकारी कवायद जारी है, लेकिन जमीनी हालात इस महत्वाकांक्षी योजना पर सवाल खड़े कर रहे हैं। एक ओर पर्यटन विभाग और नगर विकास विभाग इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व वाले परिसर को आकर्षक स्वरूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं, तो दूसरी ओर यहां फैली गंदगी, कूड़े के ढेर, बजबजाते नाले और दुर्गंध पूरे प्रयास पर पानी फेरते नजर आ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस जगह को शहर के पर्यटन नक्शे पर प्रमुख पहचान दिलाने की तैयारी की जा रही है, वहां मौजूदा हालत बेहद चिंताजनक है। हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु, स्थानीय लोग और बाहर से आने वाले पर्यटक यहां पहुंचते हैं, लेकिन परिसर की स्वच्छता व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में बनी हुई है। सफाई के अभाव में यह स्थल न केवल अपनी खूबसूरती खो रहा है, बल्कि लोगों के लिए असुविधा और परेशानी का कारण भी बनता जा रहा है।
विकास की योजना, लेकिन जमीनी तस्वीर उलट
सरकारी स्तर पर गांधी सरोवर परिसर के विकास, सौंदर्यीकरण और पर्यटन संभावनाओं को बढ़ाने की दिशा में काम शुरू किया गया है। योजना के तहत इस इलाके को अधिक व्यवस्थित, आकर्षक और सुविधायुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, इस काम को पूरा होने में अभी लंबा समय लगने की संभावना जताई जा रही है।
परिसर की वर्तमान स्थिति देखी जाए तो यह साफ दिखाई देता है कि बुनियादी स्वच्छता और रखरखाव के बिना किसी भी विकास योजना का अपेक्षित असर सामने आना मुश्किल होगा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अगर पर्यटन स्थल के रूप में किसी स्थान को विकसित करना है, तो सबसे पहले वहां साफ-सफाई, जल निकासी, कचरा प्रबंधन और दुर्गंध जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान जरूरी है।
कूड़े के ढेर और दुर्गंध से बिगड़ रहा माहौल
गांधी सरोवर परिसर के आसपास कई हिस्सों में कूड़ा जमा होने की समस्या लगातार बनी हुई है। उत्तर दिशा के प्रवेश मार्ग के पास, रास्तों के किनारे और अन्य स्थानों पर फैली गंदगी लोगों को सबसे अधिक परेशान कर रही है। सुबह और दोपहर के समय यहां से गुजरने वाले लोगों को बदबू और अस्वच्छ माहौल का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, परिसर के समीप कुछ स्थान ऐसे बन गए हैं जहां अलग-अलग वार्डों से लाया गया कचरा अस्थायी रूप से डाला जाता है। यही कचरा धीरे-धीरे बड़े ढेर का रूप ले लेता है और फिर आसपास का वातावरण दूषित होने लगता है। तेज धूप या नमी के दौरान यहां से उठने वाली बदबू और भी ज्यादा असहनीय हो जाती है।
इस स्थिति का असर केवल पर्यटकों पर ही नहीं, बल्कि रोज सुबह-शाम टहलने आने वाले स्थानीय लोगों, दुकानदारों और आसपास रहने वाले परिवारों पर भी पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि सुंदर और शांत वातावरण की उम्मीद लेकर आने वाले आगंतुकों को यहां निराशा ही हाथ लगती है।
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खटाल, नाला और तालाब—तीनों से बढ़ रही परेशानी
गांधी सरोवर परिसर की बदहाली का एक बड़ा कारण उसके आसपास की अव्यवस्थित सफाई और जल निकासी व्यवस्था भी है। लोगों का कहना है कि खटाल से निकलने वाली गंदगी और आसपास के भरे हुए नालों की वजह से इलाके में लगातार दुर्गंध बनी रहती है। इससे न सिर्फ चलना-फिरना मुश्किल हो जाता है, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ जाते हैं।
कई स्थानीय नागरिकों ने शिकायत की है कि खटाल से निकलने वाला गंदा पानी और कचरा आसपास के नालों में बहता है, जिससे गंदगी का दायरा और बढ़ जाता है। नालों की नियमित सफाई नहीं होने के कारण वहां गाद, कचरा और गंदा पानी जमा रहता है, जो पूरे क्षेत्र की स्वच्छता व्यवस्था पर नकारात्मक असर डालता है।
तालाब के किनारे और भीतर के हिस्सों में भी कई जगह गंदगी दिखाई देती है। कुछ स्थानों पर पानी के किनारे कचरा जमा है, जबकि कई हिस्सों में अव्यवस्था साफ देखी जा सकती है। यह स्थिति उस स्थल की गरिमा और पर्यटन संभावना दोनों को कमजोर करती है।
पर्यटक और श्रद्धालु क्या लेकर जाएंगे संदेश?
पटना साहिब देश और दुनिया में अपनी धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान के लिए जाना जाता है। ऐसे में गांधी सरोवर जैसा सार्वजनिक स्थल यदि बेहतर ढंग से विकसित हो जाए तो यह न केवल स्थानीय पर्यटन को मजबूती देगा, बल्कि शहर की छवि को भी निखारेगा। लेकिन मौजूदा हालत में यहां आने वाले लोगों के मन में एक नकारात्मक प्रभाव बनना स्वाभाविक है।
पर्यटन किसी भी शहर के लिए सिर्फ सुंदर इमारतों या सजावट का नाम नहीं है, बल्कि यह साफ-सफाई, व्यवस्था, सुविधा और अनुभव का भी सवाल है। अगर किसी पर्यटन स्थल के प्रवेश द्वार पर ही कूड़ा, दुर्गंध और गंदगी मिले, तो वहां की पूरी छवि प्रभावित होती है।
यही वजह है कि स्थानीय नागरिकों का कहना है कि गांधी सरोवर परिसर के विकास के साथ-साथ स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। अगर सफाई व्यवस्था मजबूत नहीं हुई, तो करोड़ों की विकास योजनाएं भी अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाएंगी।
स्थानीय लोगों में नाराजगी, सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल
आसपास रहने वाले कई लोगों ने नगर निगम की सफाई व्यवस्था पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि यहां नियमित सफाई, कचरा उठाव और नालों की सफाई की व्यवस्था पर्याप्त नहीं दिखती। कूड़ा जमा होने के बाद उसे समय पर हटाया नहीं जाता, जिससे समस्या लगातार बढ़ती जाती है।
लोगों का कहना है कि कई बार छोटी गाड़ियों और ई-रिक्शा के जरिए मोहल्लों से कचरा यहां लाकर डाला जाता है। बाद में बड़े वाहन से उसे हटाया जाता है, लेकिन इस बीच पूरे इलाके में गंदगी और दुर्गंध फैल जाती है। यह प्रक्रिया न सिर्फ असुविधाजनक है, बल्कि पर्यटन स्थल के लिए बिल्कुल अनुपयुक्त भी मानी जा रही है।
स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि कूड़ा जमा करने के लिए किसी वैकल्पिक और उपयुक्त स्थान की पहचान की जाए, ताकि गांधी सरोवर परिसर जैसे सार्वजनिक स्थल को इस बोझ से मुक्त किया जा सके।
सवाल सिर्फ सफाई का नहीं, शहर की छवि का भी है
गांधी सरोवर परिसर की समस्या केवल स्थानीय असुविधा तक सीमित नहीं है। यह पटना सिटी की समग्र शहरी छवि और प्रशासनिक प्राथमिकताओं का भी सवाल है। जब कोई क्षेत्र पर्यटन और सार्वजनिक महत्व का हो, तो वहां सफाई, रखरखाव और निगरानी व्यवस्था और अधिक मजबूत होनी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर प्रशासन वास्तव में इस परिसर को पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करना चाहता है, तो उसे विकास कार्यों के साथ-साथ कचरा प्रबंधन, नाला सफाई, पशुजनित गंदगी नियंत्रण, तालाब संरक्षण और सार्वजनिक सुविधाओं पर समान रूप से ध्यान देना होगा।
स्थायी समाधान के बिना नहीं बदलेगी तस्वीर
गांधी सरोवर परिसर की वर्तमान हालत यह संकेत देती है कि केवल अस्थायी सफाई अभियान या कागजी योजनाओं से स्थिति नहीं सुधरेगी। इसके लिए ठोस और दीर्घकालिक व्यवस्था जरूरी है। विशेषज्ञ और स्थानीय लोग सुझाव दे रहे हैं कि:
कूड़ा जमा करने के लिए अलग स्थान तय किया जाए
नालों की नियमित सफाई हो
खटाल क्षेत्र की निगरानी बढ़े
तालाब और परिसर की दैनिक सफाई सुनिश्चित की जाए
पर्यटकों के लिए स्वच्छ और व्यवस्थित माहौल बनाया जाए
यदि ऐसा नहीं हुआ, तो आने वाले समय में यह स्थल विकास के दावों और बदहाली की हकीकत के बीच फंसा रह जाएगा।
पर्यटन की पहचान तभी बनेगा गांधी सरोवर, जब गंदगी से मिलेगी मुक्ति
गांधी सरोवर परिसर को विकसित करने की योजना निश्चित रूप से स्वागतयोग्य है, लेकिन यह तभी सफल मानी जाएगी जब यहां आने वाले लोगों को साफ-सुथरा, व्यवस्थित और सुखद वातावरण मिल सके। फिलहाल स्थिति यह है कि विकास की संभावनाओं के बीच गंदगी सबसे बड़ी बाधा बनकर खड़ी है।
अब निगाहें प्रशासन और नगर निगम पर हैं कि वे इस ऐतिहासिक और सार्वजनिक महत्व वाले स्थल को केवल योजना का हिस्सा बनाकर छोड़ते हैं या वास्तव में उसे ऐसा रूप देते हैं, जिस पर पटना सिटी गर्व कर सके।
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